kavita

अब तो बस ………!!!

Hi Friends   “सम्हाले से भी कहाँ सम्हलता  है अब तो ………. दबाये हूं सीने में ,फिर भी आँखो से छलकता है अब तो ………… खामोश हूँ लेकिन , शोर  मेरे दर्द का  गूँजता है अब तो ……… ख्वाहिश तो है दर्द सागर का पीने की, पर खुद ही दर्द …

kavita

” मेरा लाड़ला “

स्त्री जिस दिन माँ बनती है उसी दिन से उस का बच्चा क्या बनेगा ये ख्वाब बुनने लगती है , पल-पल  ये इंतज़ार करती है की कब वो घडी आएगी  जब उस का लाडला स्कूल की पहली सीढ़ी चढेगा ………..मेरा भी वो इंतज़ार जिस दिन खत्म हुआ और मेरा लाडला …

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” माँ तुम्हारे बिना………….!!!”

  ”यूँ तो जीवन में ना कोई कमी है …….. जाने के बाद भी तुम्हारे ……….. ये ना एक पल भी थमी है …………. जब याद तुम्हारी आती है ……. बस ये साँसे ही ना रुक पाती है …………. साथ कहने को आज रिश्तो के नाम पर सभी है ……….. …