स्त्री जिस दिन माँ बनती है उसी दिन से उस का बच्चा क्या बनेगा ये ख्वाब बुनने लगती है , पल-पल  ये इंतज़ार करती है की कब वो घडी आएगी  जब उस का लाडला स्कूल की पहली सीढ़ी चढेगा ………..मेरा भी वो इंतज़ार जिस दिन खत्म हुआ और मेरा लाडला जिस दिन स्कूल गया उस से ज्यादा घबराहट मुझ में थी ऐसा लग रहा था मनो मैं पुनः छोटी सी बच्ची बन गयी हूँ ……तो मेरा वो पहला अनुभव, वो भाव जो दिल में उस वक़्त हिलोरे ले रहे थे  को  कुछ पंक्तियों में समेटने का छोटा सा प्रयास………..

                                                                                                                     

मेरा नन्हा सा बेटा आज बड़ा हो गया…….

कल तक लड़खड़ाते थे जो कदम,
आज……
उन्ही के साथ आगे बड़ गया……

माँ के आँचल से निकल कर देखो …..
वो विधयालय कि पहली सीढ़ी चढ़ गया….

अभी तक माँ का प्यार,दुलार और फटकार यही जीवन था

आज………..

नये दोस्तों के साथ एक नयी दुनिया में रच बस गया……

देख कर इस पल को एक माँ कि आँखों में पानी
और मन गर्व से भर गया……..”रचित” –

इस “रचना” का मान ,अभिमान  और प्रेरणा हो तुम ……..

बन के एक अच्छा और सच्चा इंसान
अपनी माँ का जीवन करना सफल तुम………

खुश हुँ बहुत के  मेरा नन्हा सा बेटा आज बड़ा हो गया…….

“रचना “

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kavita
अब तो बस ………!!!

Share this on WhatsApp Hi Friends   “सम्हाले से भी कहाँ सम्हलता  है अब तो ………. दबाये हूं सीने में ,फिर भी आँखो से छलकता है अब तो ………… खामोश हूँ लेकिन , शोर  मेरे दर्द का  गूँजता है अब तो ……… ख्वाहिश तो है दर्द सागर का पीने की, …

kavita
” माँ तुम्हारे बिना………….!!!”

Share this on WhatsApp   ”यूँ तो जीवन में ना कोई कमी है …….. जाने के बाद भी तुम्हारे ……….. ये ना एक पल भी थमी है …………. जब याद तुम्हारी आती है ……. बस ये साँसे ही ना रुक पाती है …………. साथ कहने को आज रिश्तो के नाम …