” माँ तुम्हारे बिना………….!!!”

 

”यूँ तो जीवन में ना कोई कमी है ……..
जाने के बाद भी तुम्हारे ………..
ये ना एक पल भी थमी है ………….
जब याद तुम्हारी आती है …….
बस ये साँसे ही ना रुक पाती है ………….
साथ कहने को आज रिश्तो के नाम पर सभी है ………..
पर माँ…………………………..
जब तड़पता है मन ……..
सुबकती है साँसे…………
बहते है नीर ……….
और घुटती है पीर…………
तो हो के अधीर ………
बस इतना ही कह पाती हूँ माँ ………….
तुम्हारे बिना
अधूरी है खुशियाँ……
सुना है आँगन………
बेजान है दर्पण ……….
खाली   है हर सपना ………
कह सकूँ किसी को ना है कोई ऐसा अपना ………
तुम्हारे बिना माँ …….अधूरी है तुम्हारी “रचना” !!!

 

“रचना”

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