अब तो बस ………!!!

Hi Friends

 

“सम्हाले से भी कहाँ सम्हलता  है अब तो ……….
दबाये हूं सीने में ,फिर भी आँखो से छलकता है अब तो …………
खामोश हूँ लेकिन , शोर  मेरे दर्द का  गूँजता है अब तो ………
ख्वाहिश तो है दर्द सागर का पीने की,
पर खुद ही दर्द का सेलाब बन गयी हूँ अब तो ……..
जीती थी जिन अपनों के लिए  कभी ,
किरकिरी आँखो की बन गयी हूँ अब तो ………
बहती नदिया सी जिन्दगी मेरी, न साहिल ना किनारा,
मोजो सी बहते जाना है बस यूँही,ना मिलेगा कभी सहारा अब तो …….
हँसी मेरे होठो की, जाने कितनी कहानियां कह जाती थी कभी ,
नि- शब्द सी कहानी बन गयी हँसी मेरी और आँखो में रह गया
सिर्फ सूखा पानी अब तो ……..

रचना “

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