Hi Friends

 

“सम्हाले से भी कहाँ सम्हलता  है अब तो ……….
दबाये हूं सीने में ,फिर भी आँखो से छलकता है अब तो …………
खामोश हूँ लेकिन , शोर  मेरे दर्द का  गूँजता है अब तो ………
ख्वाहिश तो है दर्द सागर का पीने की,
पर खुद ही दर्द का सेलाब बन गयी हूँ अब तो ……..
जीती थी जिन अपनों के लिए  कभी ,
किरकिरी आँखो की बन गयी हूँ अब तो ………
बहती नदिया सी जिन्दगी मेरी, न साहिल ना किनारा,
मोजो सी बहते जाना है बस यूँही,ना मिलेगा कभी सहारा अब तो …….
हँसी मेरे होठो की, जाने कितनी कहानियां कह जाती थी कभी ,
नि- शब्द सी कहानी बन गयी हँसी मेरी और आँखो में रह गया
सिर्फ सूखा पानी अब तो ……..

रचना “

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kavita
” मेरा लाड़ला “

Share this on WhatsApp स्त्री जिस दिन माँ बनती है उसी दिन से उस का बच्चा क्या बनेगा ये ख्वाब बुनने लगती है , पल-पल  ये इंतज़ार करती है की कब वो घडी आएगी  जब उस का लाडला स्कूल की पहली सीढ़ी चढेगा ………..मेरा भी वो इंतज़ार जिस दिन खत्म …

kavita
” माँ तुम्हारे बिना………….!!!”

Share this on WhatsApp   ”यूँ तो जीवन में ना कोई कमी है …….. जाने के बाद भी तुम्हारे ……….. ये ना एक पल भी थमी है …………. जब याद तुम्हारी आती है ……. बस ये साँसे ही ना रुक पाती है …………. साथ कहने को आज रिश्तो के नाम …